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RBI का रेट कट पर फैसला आज, बैंकिंग-ऑटो सहित इन सेक्टर्स को मिल सकता है बूस्ट

डीमोनेटाइजेशन के बाद बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ी है। इसे देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आज रेपो रेट में कटौती कर सकता है। माना जा रहा है कि इसमें 25 बेसिस प्वॉइंट से 50 बेसिस प्वॉइंट तक की कटौती की जा सकती है। एक्सपर्ट यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि सीआरआर में बड़ी कटौती कर बैंकों को राहतदी जा सकती है। इसे देखते हुए मार्केट एक्सपर्ट ऑटो, बैंकिंग, रियल्टी जैसे सेक्टर में लॉंग टर्म में अच्छे रिटर्न की उम्मीद जता रहे हैं।.

इन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा
अगर ऐसा होता है तो रियल्टी, ऑटो, एसएमई, बैंकिंग, हाउसिंग फाइनेंस जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। ऐसे में इन्वेस्टर्स इन कंपनियों के शेयर में दांव लगा सकते हैं। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि अगर 50 बेसिस प्वॉइंट की कटौती होती है तो मार्केट इसे सरप्राइज के तौर पर लेगा और खरीदारी बढ़ सकती है। उस दौरान जिस सेक्टर के जो शेयर अच्छा परफॉर्म करें, उसमें निवेश बेहतर होगा।

क्या होगा मार्केट पर असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक मार्केट को ऐसा लग रहा है कि 7 दिसंबर को आने वाली क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई दरों में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर सकता है। ऐसा होने पर मार्केट में मुनाफा वसूली देखने को मिल सकती है। अगर इससे ज्यादा की कटौती होती है तो यह मार्केट के लिए एक सरप्राइज होगा।

ऑटो और बैंकिंग में निवेश का मौका
मार्केट एक्सपर्ट अम्बरीश बालीगा के अनुसार आरबीआई द्वारा रेट कट करने से मार्केट पर पॉजिटिव असर होगा। इससे सबसे ज्यादा फायदा ऑटो सेक्टर और खासतौर से सरकारी बैंकों को होगा।. अगर ऐसा होता है तो इन्वेस्टर्स इनके शेयर्स में दांव लगा सकते हैं।.

रियल्टी सेक्टर को मिलेगा बूस्ट
नोटबैन के बाद रियल्टी सेक्टर काफी सुस्त है। लेकि आरबीआई द्वारा अगर रेट कट किया जाता है तो हाउसिंग लोन की दरें कम हो जाएंगी। इससे मौजूदा समय से डिमांड में जरूर बढ़ोतरी होगी और इस सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।.

ये हैं रेट सेंसिटिव सेक्टर
बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को रेट सेंसिटिव सेक्टर कहा जाता है। इंटरेस्ट रेट में बढ़ोत्तरी या कमी का सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स के स्टॉक्स पर ही देखने को मिलता है। वैसे भी इस समय नोटबंदी के चलते इंडस्ट्री डिमांड में कमी की समस्या से जूझ रही है। सबसे ज्यादा डिमांड रियल एस्टेट में घटी है। अगर इंटरेस्ट रेट कम होती हैं तो रियल्टी डेवलपर्स के लिए डिमांड बढ़ाने के लिए नए ऑफर पेश करना आसान हो जाएगा।.

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